वेश्यावृत्ति करती बच्चियों की ये तस्वीरें आपको सुन्न कर देगा!

हम इसका प्रचार नहीं कर रह है! हम भी इसके खिलाफ है! इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको बताना चाहते है की जिस उम्र मे बच्चियों  को खेलना चाहिए उस उम्र में कुछ घटिया किसम के लोग उन्हें अपने हवस का शिकार बना देते है।६-८ साल की उम्र की लड़कियों को १५-२० ग्राहकों के हवस का शिकार बनना रोज़ बनना पड़ता है । हर दिन अपने बचपन को भूलकर अपने ग्राहक को खुश करना होता है!


इसी काम से उनका पेट भरता है, उसी से ज़िन्दगी चलती है। अगर ये हर दिन इतने लोगों के साथ हमबिस्तर न हों, तो तीनों वक़्त का खाना भी इनको नसीब नहीं होता।

वहां जब कोई मासूम आती है, तो सबसे पहले उसके बचपन को कुचल दिया जाता है और फिर भेड़ियों के सामने उसके जिस्म को फेंक दिया जाता है। फिर हर दिन, हर रात, उन्हें अपने अस्तित्व को खुरच-खुरचकर मिटाते हुए काटना

आखिर इससे मिलने वाले 10 से 12 डॉलर्स ही तो उनकी ज़िन्दगी हैं। ये बात अलग है कि ये पैसे उनके पास नहीं आते, बल्कि जिस अधेड़ महिला के अंडर में वे रहती हैं, उनके पास जाते हैं।

इन्हें तो बस पेट भरने को कुछ रोटियां मिल जाती हैं। कभी-कभी ये अधेड़ महिलाएं इन बच्चियों को तोहफ़े भी दे देती हैं, लेकिन इन तोहफ़ों में ‘लाश’ बन चुकी इन मासूमों को कोई दिलचस्पी नहीं रहती।

यहां एक और मुसीबत इनका पीछा करती है, वो है इनकी सुरक्षा के नाम पर वेश्यालय के बाहर तैनात लड़कों को खुश करने की।

वे इनसे पैसे तो लेते ही हैं, इन मासूम बच्चियों का गोश्त भी चाहते हैं| इन्हें यहां ‘बाबू’ कहा जाता है। पुरुष प्रधान समाज में ये वेश्यावृत्ति करने वाली लड़कियों की सुरक्षा के लिए हमेशा वेश्यालय के बाहर ह

जब बचपन दम तोड़ता है, सिसकियां दबा दी जाती हैं और इंसान हैवान का रूप लेता है, तब जन्म होता है नाबालिगों की वेश्यावृत्ति का।

इन्हें इस्तेमाल करके अपने इज़्ज़तदार समाज में रह रहे लोगों सुनो, ये वेश्या इसलिए बन गईं क्योंकि तुम इज्ज़तदार नहीं हो, इसलिए नहीं क्योंकि इनकी कोई इज़्ज़त नहीं है !

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