पार्च्ड के इन प्राइवेट सीन्स पर नहीं है राधिका को आपत्ति, दिया सेंसर बोर्ड को करारा जवाब...

अगर औरत बच्चा ना दे पाए तो वो "बाँझ" कहलाती है। अगर मर्द की जिस्मानी ख़्वाहिशात पूरी करनी पड़े तो "तवाइफ़" कहलाती है। और जाने कितने नाम औरत की ज़ात से जोड़ दिए गए हैं लेकिन ख़ामोश रहना उसकी फ़ितरत में है। वही औरत जिसे माँ का रुतबा भी आप देते हैं। वही औरत जिसे बीवी के रूप में घर की ज़ीनत बनाते हैं। वही औरत जिसके धागे की डोर से बन्ध जाते हैं। वही औरत अगर समाज की दुखती हुई नस पर हाथ रख दे तो उसे दबा दिया जाता है।
जब बिना किसी डर के "एडल्ट मूवीज" मूवीज़ देख ली जाती है तो फिर समाज के कड़वे सच को सामने लाने वाली इन फ़िल्मों को क्यों तानो-बानो से जूझना पड़ता है। 
दी गई कुछ तस्वीरें जो सेंसर बोर्ड के द्वरा "पार्च्ड" मूवी में ब्लर की गई हैं-


यह धुंध फ़िल्मों के साथ साथ, आँखों में भी पड़ चुकी है।

राधिका कि ज़ुबानी "मैंने लोगों को इंडियन और इंटरनेशनल स्टेज पर न्यूड होकर परफॉर्म करते देखा है। मुझे यह समझ नहीं आता कि अपने शरीर को लेकर शर्म क्यों करूं। मैं एक आर्टिस्ट हूँ और अपनी बॉडी को एक मीडियम के तौर पर इस्तेमाल करती हूँ।"

एक सच यह भी।

ज़्यादा अगर कहूँगी तो जनता बुरा मान जाएगी। मेरा मकसद किसी पर सवाल उठाना बिल्कुल नहीं है, मैं तो सिर्फ उस सोच में गुम हूँ कि ऐसी कौनसी वजह है जो हकीकत को सामने नहीं लाने देती।

प्यार करना भी सीखना पड़ेगा।

अगर बिस्तर पर पड़ी सिलवटों को शब्दों का आकार दे दिया जाए, तब भी शायद औरत की पीड़ा का वर्णन नहीं किया जा सकता। प्यार करना सिखाया जिसने, उसे भी प्यार उसकी इच्छानुसार किया जाए, खिलौने कि तरह नहीं।

क्या बाँझ सिर्फ औरत ही हो सकती है?

ये ज़रूरी तो नहीं की भीड़ जिस रास्ते पर चल रही हो, वही रास्ता सही है ? राधिका यह फ़िल्म में उस महिला का किरदार निभा रही हैं, जिसका पति कहता है "एक बच्चा तो दे नहीं सकती बाँझ कहीं की " अब जानना यह है कि क्या कमियां सिर्फ औरत में ही हो सकती हैं? क्या मर्द किसी "मेडिकल प्रॉब्लम" का शिकार नहीं हो सकते?

राधिका ने बहुत ही मज़बूत किरदार निभाया था "कबाली" की पत्नी के रूप में।

यह अभिनेत्री जिन्होंने मराठी फ़िल्मों में कई मज़बूत किरदार निभाए हैं और हिंदी फ़िल्मों में भी इनकी अदाकारी को नाकारा नहीं जा सकता। फ़िलहाल यह "पार्च्ड" मूवी को लेकर चर्चा में हैं। सॉरी! "पार्च्ड" मूवी के न्यूड सीन्स को लेकर चर्चा में हैं।

आदिल हुसैन को भी सहनी पड़ी सख्त टिप्पणियाँ।

आदिल हुसैन जो कि बहुत ही गम्भीर अदाकार हैं। यह बहुत बारीकी से हर किरदार को निभाते हैं। "इंग्लिश इंग्लिश", "मैं और चार्ल्स" एवं "ज़ेड प्लस" में इनकी एक्टिंग क़ाबिले तारीफ़ है और आदिल हुसैन खुद भी जवाब कि तलाश में हैं कि सीन को धुँधलाया क्यूँ गया ?

राधिका का गुस्सा भी है जायज़।

राधिका कहती हैं कि "आखिर इसे सिर्फ राधिका आप्‍टे के सेक्‍स सीन क्‍यों बताया जा रहा है, आदिल हुसैन सेक्‍स सीन क्‍यों नहीं? इसका मतलब है कि अगर कोई पुरुष करे तो कोई बात नहीं लेकिन अगर वही कोई महिला करे तो वह मुद‌्दा बन जाता है।" हाँ राधिका महिला करे तो मुद्दा बन ही जाता है।

मूवी का ट्रेलर देखना ना भूलें।

Latest Lists

Bollywood
Entertainment
Bollywood
Bollywood